कालसर्प दोष मंगल पूजा उज्जैन

उज्जैन मे कालसर्प दोष पूजा, मंगल दोष शांति पूजा, भात पूजा, अंगारक दोष पूजा जैसी दोष निवारण पूजा के लिए पंडित जी से संपर्क करे।
पंडित  जी उज्जैन मे 20 वर्षो से भी ज्यादा से दोष निवारण अनुष्ठान कर रहे है और दोष से पीड़ितो को दोष से मुक्ति दिला रहे है, अगर आपकी कुंडली मे भी कोई दोष है तो आप उसके निवारण हेतु पंडित जी द्वारा विधि विधान से पूजा करा सकते है। पूजा बुक करने के लिए अभी पंडित जी को कॉल करे।

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PANDIT :- AMIT SHARMA

पंडित अमित गुरु १५ वर्षो से भी ज्यादा हो गया है। पंडित जी पूरी उज्जैन नगरी में कालसर्प पूजा, मंगल दोष महामृत्युंजय जाप, दुर्गा सप्तसती पाठ , कुम्भ विवाह, अर्क विवाह, जन्म कुंडली पत्रिका मिलान वास्तु पूजन, वास्तु दोष निवारण एवं व्यापर व्यवसाय वाधा निवारण का पूजन सभी धार्मिक पूजन अनुष्ठान सम्पूर्ण वैदिक ब्राह्मण द्वारा संपादित किया जाता है

Puja

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कालसर्प दोस्त पूजा

परिश्रम करने के पश्चात भी बार बार असफलता प्राप्त होना। परिवार मे कलह और झगड़े का माहौल बने रहना। व्यापार मे सदैव हानि होना।  रिश्तेदारों से मधुर संबंध न रहना। संतान नही होती है, अगर होती भी है तो वह सदैव बीमार रहती है। घर मे मांगलिक और शुभ कार्य का न हो पाना।
अपने किसी मृत परिजन को स्वप्न मे देखना। संपत्ति और धन की हानि लगातार होते रहना। कम आत्मविश्वास।

महामृत्युंजय जाप

महामृत्युंजय मंत्र का जप कराने से हमारी कुंडली के समस्त दोष जैसे मांगलिक दोष, नाड़ी दोष, कालसर्प दोष, भूत-प्रेत दोष, रोग, दुःस्वप्न, गर्भनाश, संतानबाधा. ओर सभी दोषों का नाश होता है।

रुद्राभिषेक

शिव कृपा से ग्रह दोष दूर होते हैं.
मन शांत होता है.
आत्मशक्ति और ज्ञान शक्ति बढ़ती है.
मानसिक बीमारियों से राहत मिलती है.
शिव की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. घर के क्लेश दूर होते हैं.
रोगों और परेशानियों से मुक्ति मिलती है.
जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है. मोक्ष का रास्ता खुलता है.
भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को धन, सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं

मंगल भात पूजा

यह देखा गया है कि जिस जातक की विवाह कुंडली में यह दोष होता है वह अत्यधिक आक्रामक, क्रोधी और अभिमानी होता है। चतुर्थ भाव में मंगल दोष का निर्माण जातक को सुख से वंचित करता है और पारिवारिक जीवन में भी परेशानियों का सामना करता है। सप्तम भाव में मंगल दोष की उपस्थिति जातक के वैवाहिक जीवन को प्रमुख रूप से प्रभावित करती है और कई चुनौतियों का सामना करती है। अष्टम भाव में इस दोष की उपस्थिति जातक को दाम्पत्य सुख से वंचित कर सकती है और विवाह में देरी, ससुराल में सुख की कमी या उनके साथ खराब संबंधों का कारण बन सकती है।
इसके अलावा बारहवें भाव में मांगलिक दोष का निर्माण होने से वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं और झगड़ों के साथ-साथ मुश्किलें भी आती हैं

मंगल पूजा नवग्रह शांति

कुंडली में मंगल दोष का निर्माण जातक के वैवाहिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। इस दोष के कारण युगल के बीच समायोजन और प्रेम की कमी हो सकती है क्योंकि यह मुख्य रूप से विवाहित लोगों को प्रभावित करता है। विवाह में देरी सहित, व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, यह व्यक्ति के जीवन को भी बाधित कर सकता है, वह कानूनी विवाद का सामना कर सकता है, दाम्पत्य सुख से वंचित हो सकता है, या दुर्घटना का शिकार हो सकता है। सभी दोषों में से मांगलिक दोष सबसे प्रभावशाली है।, यदि मंगल के अलावा किसी भी घर में अर्थात 1, 4, 7, 8 और 12 वें घर में; सूर्य, राहु या केतु को देखा जाता है तो यह द्विबल मांगलिक दोष बनाता है।

गुरु चांडाल

ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति या बृहस्पति ग्रह को सबसे बड़ा और सबसे शुभ ग्रह माना जाता है। लेकिन यदि बृहस्पति के साथ राहु भी स्थित हो तो बृहस्पति की सकारात्मक चीजें नष्ट हो जाती हैं और नकारात्मक चीजें उत्पन्न हो जाती हैं और व्यक्ति के जीवन में समस्याएं और चिंताएं पैदा हो जाती हैं। कुंडली में कई शुभ और अशुभ योग होते हैं। उनमें से एक है चांडाल योग। यह योग अत्यंत विनाशकारी योग माना जाता है।

पितृ दोष

परिवार में हमेशा कलेश की स्थिति रहना.
संतान प्राप्ति में बाधा आना.
घर में कोई न कोई हमेशा बीमार रहना.
नौकरी मिलने में कठिनाई होना.
कारोबार में दिनोंदिन कमी होना.
तुलसी का पौधा सूख जाना.
घर में पीपल का पौधा उग जाना.
परिवार में कोई दुर्घटना होना.
परिवार में विकलांग या अनचाहे बच्चे का जन्म होना
जीवन में तरक्की नहीं होना.
परिवार के सदस्य का विवाह न होना
किसी सदस्य को बुरी आदतों की लत लगना यहां सब पितृदोष के लक्षण होते हैं

राहु केतु शांति

आर्थिक नुकसान
शारीरिक परेशानियां
मानसिक परेशानियां
परिवार में कलह
रात की नींद न आना
धन का दुरुपयोग
जोड़ों का दर्द
संतान प्राप्ति में रुकावट
अचानक धोखाराहु-केतु को छाया ग्रह माना गया है. ये दोनों ही ग्रह अक्सर बुरे परिणाम देते राहु-केतु के बीज मंत्रों का जाप करना चाहिये

ग्रहणशांति

मनुष्य की जन्म कुंडली में कई योग और दोष बनते हैं। इसके प्रभाव से इंसान को जीवन में सफलता और असफलता मिलती है। साथ ही जब कभी सूर्य या चंद्रग्रहण लगता है तो इसके कारण कुंडली में ग्रहण दोष बनता है। ग्रहण दोष एक अशुभ दोष होता है जिसकी वजह से व्यक्ति को अनेक प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। होरा शास्त्र के मुताबिक जब इंसान की लग्न कुंडली के 12वें भाव में चंद्रमा के साथ राहु या केतु में से कोई एक ग्रह रहता है तब ग्रहण दोष बनता है।

मूल शांति

अश्वनी ,आश्लेषा ,मघा ,ज्येष्ठा ,मूल तथा रेवती नक्षत्र गण्डमूल नक्षत्र कहे जाते हैं. यह नक्षत्र संधि क्षेत्र में आने से दुष्परिणाम देने वाले माने जाते हैं. इन नक्षत्रों में जन्म लेने वाले बच्चों के सुखमय भविष्य के लिए इन नक्षत्रों की शांति करवानी आवश्यक मानी गई है. मूल शांति कराने से इनके कारण लगने वाले दोष शांत हो जाते हैं. अन्यथा इनके अनेक प्रभाव लक्षित होते हैं जो इस प्रकार से प्रभावित कर सकते हैं. अश्वनी नक्षत्र के पहले चरण में जन्म हो तो पिता को कष्ट तथा अन्य चरणों में शुभ होता है.

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Raja Patel
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2 years ago
Jai shree mahkal did a lot of puja which benefited him a lot.
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Harshit Sharma
2 years ago
Jai shree mahakal guru ji. You have worshiped a lot. He did it
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Harish Vyas
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Mangal Puja Ujjain

पंडित श्री अमित गुरु जी धार्मिक अनुष्ठानों में रूचि अपने बालयकाल से ही थी, पंडित जो को समस्त प्रकार के अनुष्ठानो का प्रयोगत्मक ज्ञान एवं सम्पूर्ण विधि विधान की जानकारी पंडित जी के पिता जी से प्राप्त हुयी है,

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